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*10 दिवसीय स्वदेशी महोत्सव का ऐतिहासिक समापन,*

*लाखों लोगों की भागीदारी से सशक्त हुआ आत्मनिर्भर भारत का संकल्प*

पंचकूला,(28 दिसंबर) कमल कलसी,

पंचकूला में आयोजित 10 दिनों तक चलने वाले स्वदेशी महोत्सव का आज भव्य और ऐतिहासिक समापन हुआ। अंतिम दिन मेले में भारी जनसैलाब उमड़ा और मेला परिसर पूरी तरह लोगों से भरा नजर आया। आयोजकों के अनुसार पूरे आयोजन के दौरान लाखों लोगों ने स्वदेशी मेले का भ्रमण किया। लोगों ने न केवल स्वदेशी उत्पादों की जमकर खरीदारी की, बल्कि स्वदेशी अपनाने की भावना की भी खुलकर सराहना की। यह मेला आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देने वाला साबित हुआ।
समापन अवसर पर स्वदेशी महोत्सव के साथ समरसता सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें मेले के आयोजन से लेकर संचालन तक योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं और सदस्यों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और स्वदेशी विचारधारा को और अधिक मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में आज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दुष्यंत गौतम ने कहा कि स्वदेशी अपनाने से ही विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि देश को आज़ादी भी विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने से ही मिली थी। आज जब दुनिया में प्रतिबंधों की राजनीति हो रही है, तब उनसे बाहर निकलने का सबसे सशक्त मार्ग स्वदेशी ही है। उन्होंने कहा कि “जय जवान, जय किसान” का नारा आज भी उतना ही प्रासंगिक है और स्वदेशी हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेशी अपनाकर ही भारत आत्मनिर्भर और सशक्त बन सकता है।
कार्यक्रम में राजेश गोयल, रजनीश गर्ग, डॉ. राजेश गोयल, सुरेंद्र गोयल, अरुण गर्ग, राजीव, रामाकांत भारद्वाज, पृथ्वीराज, राजेश भाटोरा, बंतो कटारिया सहित अनेक प्रमुख आयोजक, सदस्य और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक आंदोलन नहीं, बल्कि यह राष्ट्र की आत्मा, संस्कृति और स्वाभिमान से जुड़ा विषय है। स्वदेशी को अपनाकर ही स्थानीय कारीगरों, लघु उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
स्वदेशी मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों और उद्यमियों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, खादी, आयुर्वेदिक एवं हर्बल उत्पाद, देसी खाद्य सामग्री और घरेलू उपयोग की वस्तुएं लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। मेले में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग पहुंचे, जबकि अंतिम दिन रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली।
समापन दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया। ओएसडी और लोकप्रिय हरियाणवी गायक गजेंद्र फोगाट ने अपनी देशभक्ति और लोकगीतों की प्रस्तुति से पूरे वातावरण को देशप्रेम और संस्कारों से ओत-प्रोत कर दिया। उनके गीतों पर दर्शक झूमते नजर आए और पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। गजेंद्र फोगाट ने कहा कि स्वदेशी मेला देशभक्ति से जुड़ा एक सशक्त मंच है और स्वदेशी अपनाना ही सच्ची देशसेवा है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों, कारीगरों, कार्यकर्ताओं और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। 10 दिवसीय स्वदेशी महोत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत और प्रेरणादायक कदम बनकर सामने आया।

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