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दुनियावी योग्यताएं और उपाधियां नहीं बल्कि परमात्मा की जानकारी ही सर्वोत्तम

दुनियावी योग्यताएं और उपाधियां नहीं बल्कि परमात्मा की जानकारी ही सर्वोत्तम

चण्डीगढ़ 28 दिसम्बर (संजय राय)।- संसार में रहते हुए इन्सान चाहे जितनी भी योग्यताएं और उपाधियां हासिल कर ले, सारे संसार में उसकी चर्चा होती हो उसका यश होता हो यहां तक कि एक आवाज लगाने से दुनियां के लोग उसके पास आ जायें इतना कुछ होते हुए भी यदि इन्सान ने जीवन में परमात्मा की जानकारी हासिल नहीं की तो ये सारी उपाधियां ये सारा यश यहीं पर ही रह जाएगा साथ जाने वाला नहीं है, ये उद्गार आज यहां सैक्टर 30 में सन्त निरंकारी सत्संग भवन में हुए निरंकारी सत्संग में हजारों की संख्या में उपस्थित श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए देहली से आए केन्द्रीय प्रचारक इन्द्रजीत शर्मा जी ने व्यक्त किए ।


परमात्मा की जानकारी के तरीके की चर्चा करते हुए श्री शर्मा जी ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि गृहस्थ को छोड़ कर पहाड़ों और गुफाओं में बैठ कर 88 हजार वर्ष तक भी तप त्याग करने वालों को परमात्मा की जानकारी नहीं हुई जब तक वो वर्तमान सत्गुरू की शरण में नहीं आए और यही जानकारी आज सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा एक पल में जन-जन को करवाई जा रही है । इसके अतिरिक्त उन द्वारा यह शिक्षा भी दी जा रही है कि गृहस्थ में रहते हुए सत्संग-सेवा-सिमरन करते रहने में जो आनन्द है वह जंगलों और पहाड़ों आदि पर तपस्या करने या कर्म-काण्डों से नहीं मिलता, गृहस्थ में रहते हुए जो इन्सान सत्संग-सेवा-सिमरन करता है उसमें दैवीय गुणों अर्थात प्यार, नम्रता, सहनशीलता, विशालता, अपनत्व, एकत्व का स्वयंमेव वास होता है और संसार में रहते हुए उसके मन पर काम-क्रोध-लोभ-मोह-अंहकार की चढ़ने वाली मैल साथ की साथ साफ होती रहती है ।
इससे पूर्व यहां अनेक वक्ताओं ने जीवन-यात्रा को सुखमयी तरीके से चलाने बारे अपने अपने भाव व्यक्त किए तथा यहां के संयोजक नवनीत पाठक जी ने शर्मा जी का यहां आने पर सारी साधसंगत की ओर से धन्यवाद व स्वागत किया और समय समय पर यहां आते रहने के लिए प्रार्थना की ।

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