नई दिल्ली, 4 नवंबर 2025 (Sanjay Rai): भारत ने अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों (Non-Fossil Sources) का हिस्सा अब लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन अभी भी अपेक्षाकृत कम है।
ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि जून 2025 तक सौर, पवन, जल और परमाणु ऊर्जा मिलाकर देश की कुल स्थापित क्षमता का लगभग आधा हिस्सा बनाती हैं। लेकिन उत्पादन के मामले में यह योगदान सिर्फ 22-25 प्रतिशत तक सीमित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्षय ऊर्जा संयंत्रों का औसत उपयोग दर (Capacity Utilization) अभी भी निम्न स्तर पर है, जिससे बिजली ग्रिड पर जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों का दबाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भारत को 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है, तो भंडारण तकनीक, स्मार्ट ग्रिड, और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश को और बढ़ाना होगा।
नीति आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि “भारत की ऊर्जा नीति अब पारंपरिक आपूर्ति से हटकर टिकाऊ उत्पादन की ओर बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन भारत की प्राथमिक शक्ति बन सकती है।