नई दिल्ली, 7 नवंबर 2025 (ईशान):पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार स्व. वीरेंद्र सेंगर निडर, सच्चे और संवेदनशील पत्रकार थे। उन्होंने हमेशा सत्य का पक्ष लिया और कठिन परिस्थितियों में भी कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि “वीरेंद्र सेंगर ने अपने जीवन में जो सत्य लिखा, उसे आत्मसात करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
यह बातें सोमपाल शास्त्री ने स्व. वीरेंद्र सेंगर द्वारा लिखित दो पुस्तकों — ‘सच के सिवाय’ और ‘आगे और आग है’ — के विमोचन समारोह में कहीं। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता उन्होंने स्वयं की।

कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी व सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। इस मौके पर प्रसिद्ध लेखक और विचारक प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।

समारोह में “स्मृतियां वीरेंद्र सेंगर की” शीर्षक से एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया, जिसमें उन पत्रकारों और मित्रों के संस्मरण शामिल थे जिन्होंने वीरेंद्र सेंगर के साथ काम किया था। देशभर के कई नामी पत्रकारों ने इस आयोजन में शिरकत की और सेंगर के योगदान को याद किया।
विभूति नारायण राय ने कहा कि “सच लिखना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन वीरेंद्र सेंगर ने कभी डर या दबाव के आगे झुकना नहीं सीखा।”
कमर वहीद नकवी ने कहा, “सच न बोलना दरअसल ठगना है। वीरेंद्र सेंगर सच्चे पत्रकार थे, निष्पक्ष थे और उन्होंने कभी किसी पक्ष की गुलामी नहीं की।”
वहीं प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा, “आज का दौर ऐसा है कि मूर्खता को सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है, लेकिन वीरेंद्र सेंगर ने हमेशा सच के पक्ष में खड़े होकर अपनी कलम से सच्चाई को जिया।”

1955 में उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के खांडेपुर गांव में जन्मे वीरेंद्र सेंगर का 26 मार्च 2025 को उत्तराखंड के नैनीताल जिले के नौकुचियाताल में निधन हो गया। उन्होंने अपने चार दशक लंबे पत्रकारिता जीवन में भारतीय मीडिया जगत में अमिट छाप छोड़ी।
सेंगर ने अपने करियर की शुरुआत कानपुर से की थी और बाद में दिल्ली आकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी निर्भीक पत्रकारिता का परचम लहराया। वे ‘चौथी दुनिया’ अखबार के आधार स्तंभ रहे और अमर उजाला, संडे मेल जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी कार्य किया।
उन्होंने उस दौर में भी हाशिमपुरा नरसंहार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर रिपोर्टिंग की, जब कोई पत्रकार उस विषय को छूने तक से हिचकता था। सेंगर की रिपोर्टिंग ने इस भीषण घटना को देश और दुनिया के सामने लाकर पत्रकारिता की असली ताकत को साबित किया।
उनकी रिपोर्टिंग को किसान नेता स्व. महेंद्र सिंह टिकैत के किसान आंदोलनों और गुजरात दंगों की कवरेज के लिए भी याद किया जाता है।

विमोचन समारोह में उनकी पत्नी रीता भदौरिया, बेटी ऋतंभरा, आलोक भदौरिया, संतोष भारतीय, विनोद अग्निहोत्री, के.एम. सिंह, धर्मपाल धनखड़, अमरनाथ सिंह, ममता सिंह, अमित नेहरा, अमरेंद्र राय, संजय राय, उमेश जोशी, और शिवाजी सरकार सहित कई जानी-मानी हस्तियाँ उपस्थित रहीं।